Category:
- सीमा के सुरक्षा प्रहरी(Boarder Security Guards)
Biography
Date of Birth: 29-04-1791
Birth Place: गुजरांवाला, पंजाब (अब पाकिस्तान में)
Death Anniversary: 30-04-1837
Summary
हरि सिंह नलवा (Hari Singh Nalwa ) महाराजा रणजीत सिंह (Ranjeet Singh) के अधीन सिख (Sikh) साम्राज्य के सेनापति(Commander) और सबसे वीर योद्धाओं में से एक थे। वे अफ़ग़ान(Afghan) और पठानों (Pathan) को हराने वाले पहले भारतीय सेनापति थे। उनकी वीरता और साहस के कारण उनका नाम सुनकर ही अफ़ग़ान बच्चे डर के मारे चुप हो जाते थे। उन्हें सिख साम्राज्य के "सिंह" (Singh)और "सीमा के रक्षक" के रूप में जाना जाता है।
Description
- हरि सिंह नलवा (Hari Singh Nalwa ) का जन्म गुजरांवाला (आज का पाकिस्तान) में एक खत्री सिख परिवार में हुआ।वे बचपन से ही साहसी, निडर और युद्ध कौशल में निपुण थे।
- महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjeet Singh)ने उनकी वीरता देखकर उन्हें सेना में उच्च स्थान दिया और बाद में सिख साम्राज्य का सेनापति बनाया।
- उन्होंने कई महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ लड़ीं, जिनमें कसूर, मुल्तान(Multan), अटक, पेशावर(Peshawar) और कश्मीर(Kashmir) की लड़ाइयाँ शामिल हैं।
- वे अफ़ग़ानों और पठानों के विरुद्ध सीमा पर सबसे मज़बूत ढाल बने और कभी भी किसी युद्ध में पराजित नहीं हुए।
- उनकी मृत्यु 1837 में जमानाबाद (खैबर दर्रे के पास) में हुई, जहाँ उन्होंने युद्ध में अदम्य साहस दिखाते हुए शहादत प्राप्त की।
Known For
- महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjeet Singh) के साम्राज्य की सीमाओं को पश्चिम की ओर अफ़ग़ानिस्तान(Afganistan) तक बढ़ाना।
- खैबर पास पर विजय प्राप्त करना और सिख साम्राज्य की सीमाओं को सुरक्षित करना।
- "Nalwa" उपाधि पाना, जब उन्होंने एक बाघ (Tiger) को निहत्थे मार गिराया।
- उनकी वीरता के कारण आज भी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में कहावत है – “जब बच्चा नहीं सुनता, तो उसकी माँ कहती है – चुप हो जा, नहीं तो हरि सिंह नलवा आ जाएगा।”