भाई सुजान सिंह (Bhai Sujan Singh)

भाई सुजान सिंह (Bhai Sujan Singh)

Category:

  • शिक्षाविद् (Educationist)
  • लेखक (Writer)

Biography

Birth Place: डेरा बाबा नानक, ज़िला गुरदासपुर(Gurdaspur), पंजाब (ब्रिटिश भारत)

Summary

भाई सुजान सिंह(Bhai Sujan Singh) एक प्रख्यात पंजाबी(Punjabi) लेखक(Writer), शिक्षाविद और समाज सुधारक(Social Reformer) थे। उनका साहित्य आम आदमी (Common Man)के जीवन, समाज के दबे-कुचले वर्ग और स्त्रियों की समस्याओं पर गहराई से केंद्रित था। वे आधुनिक पंजाबी कहानी (Story)साहित्य (literature)के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिने जाते हैं।

Description

भाई सुजान सिंह (Bhai Sujan Singh) का बचपन कलकत्ता(Calcutta) में ननिहाल में बीता। उन्होंने अपने जीवन में बैंक क्लर्क(Bank Clerk), अध्यापक(Teacher), हेडमास्टर (Headmaster)और बाद में गुरु नानक कॉलेज(Guru Nanak College), गुरदासपुर (Gurdaspur)के प्रिंसिपल(Principal) के रूप में कार्य किया।

उनका साहित्य यथार्थवाद से प्रेरित था, जिसमें उन्होंने समाज की असमानताओं, गरीब वर्ग के संघर्ष और स्त्रियों की मनोवैज्ञानिक स्थितियों को बहुत संवेदनशीलता के साथ उकेरा।

1986 में उन्हें उनकी कृति शहर ते गराँ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Known For

पंजाबी लघु-कथाएँ और निबंध, सामाजिक यथार्थवाद, स्त्रियों की मनोवैज्ञानिक दशा का चित्रण, तथा साहित्य

अकादमी पुरस्कार (1986) प्राप्त करना।