गुरु हरगोबिंद जी (Guru Hargobind Ji Biography in Hindi) का जन्म 19 जून 1595 को वदाली, अमृतसर (Punjab) में हुआ। वे पाँचवें सिख गुरु गुरु अर्जन देव जी (5th Sikh Guru Arjan Dev Ji) और माता गंगा जी के पुत्र थे। अपने पिता गुरु अर्जन देव जी की शहादत (Martyrdom of Guru Arjan Dev Ji) के बाद 11 जून 1606 को गुरु हरगोबिंद जी ने गुरु गद्दी (Guru Gaddi) संभाली।
प्रमुख योगदान (Major Contributions of Guru Hargobind Ji)
मिरी-पिरी (Miri-Piri) की परंपरा: आध्यात्मिक शक्ति (Piri) और राजनीतिक/सांसारिक शक्ति (Miri) का संतुलन स्थापित किया।
अकाल तख़्त (Akal Takht) का निर्माण – 1609: यह आज भी सिखों का सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक केंद्र (Highest Sikh Authority) है।
सिखों को शस्त्र धारण और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण: ताकि सिख अन्याय और अत्याचार का सामना कर सकें।
मुगलों के खिलाफ युद्ध (Battles against Mughals): कई युद्धों का नेतृत्व कर सिख समुदाय को आत्मरक्षा के लिए सशक्त बनाया।
52 राजाओं की रिहाई (Bandi Chhor Diwas): गुरु हरगोबिंद जी ने बादशाह जहांगीर की कैद से 52 हिंदू राजाओं (52 Hindu Kings) को आज़ाद कराया।
अंतिम समय (Death of Guru Hargobind Ji)
3 मार्च 1644 को गुरु हरगोबिंद जी का कीरतपुर साहिब (Punjab) में देहांत हुआ। उन्हें सिख इतिहास (Sikh History) में “संत-सिपाही (Saint-Soldier)” परंपरा का प्रवर्तक माना जाता है।
➤ छठे सिख गुरु (6th Sikh Guru)
➤ मिरी-पिरी (Miri-Piri) की परंपरा के संस्थापक
➤ अकाल तख़्त (Akal Takht) का निर्माण
➤ 52 राजाओं की रिहाई (Bandi Chhor Diwas)
➤ संत-सिपाही परंपरा (Saint-Soldier Tradition)
➤ धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के रक्षक