गुरु हर राय जी (Guru Har Rai Ji Biography in Hindi) का जन्म 16 जनवरी 1630 को कीरतपुर साहिब, पंजाब (Kiratpur Sahib, Punjab) में हुआ। वे सिखों के सातवें गुरु (7th Sikh Guru) थे। गुरु हर राय जी, गुरु हरगोबिंद जी (6th Sikh Guru) के पौत्र (Grandson) और बाबा गुरदित्ता जी व माता निहाल कौर जी के पुत्र थे।
8 मार्च 1644 को उन्होंने गुरु गद्दी (Guru Gaddi) संभाली।
गुरु हर राय जी एक शांतिप्रिय संत (Peaceful Saint) थे, लेकिन वे हमेशा सिखों को आत्मरक्षा (Self-Defense) के लिए तैयार रहने की प्रेरणा देते रहे।
उन्होंने एक विशाल औषधालय (Herbal Dispensary) और अस्पताल की स्थापना की, जहाँ बीमार और ज़रूरतमंद लोगों की निःशुल्क सेवा (Free Medical Service) होती थी। कहा जाता है कि मुग़ल बादशाह शाहजहाँ (Mughal Emperor Shah Jahan) के बेटे दारा शिकोह (Dara Shikoh) को उनकी औषधियों से जीवनदान मिला।
गुरु हर राय जी ने सिख धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए 360 प्रचारकों (360 Preachers) को नियुक्त किया, जिन्होंने सिख धर्म का संदेश दूर-दूर तक प्रचार-प्रसार किया
अंतिम समय (Death of Guru Har Rai Ji)
6 अक्टूबर 1661 को गुरु हर राय जी का कीरतपुर साहिब, पंजाब में देहांत हुआ। अपने अंतिम समय में उन्होंने अपने छोटे पुत्र गुरु हरकिशन जी (8th Sikh Guru) को गुरु गद्दी सौंपी।
➤ सातवें सिख गुरु (7th Sikh Guru)
➤ करुणा और दया के प्रतीक
➤ औषधालय और अस्पताल की स्थापना
➤ दारा शिकोह को जीवनदान
➤ सिख धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान
➤ गुरु हरकृष्ण जी को गुरु गद्दी सौंपना