गुरु अर्जन देव जी (Guru Arjan Dev Ji) का जन्म 15 अप्रैल 1563 को गोइंदवाल (पंजाब) में हुआ। वे गुरु राम दास जी और माता बीवी भानी जी के पुत्र थे।
गुरु गद्दी पर विराजमान (Guru Gaddi)
1 सितंबर 1581 को अपने पिता गुरु राम दास जी के देहांत के बाद, गुरु अर्जन देव जी पाँचवे सिख गुरु (Fifth Sikh Guru) बने।
गुरु अर्जन देव जी का प्रमुख योगदान (Major Contributions of Guru Arjan Dev Ji)
हरमंदर साहिब (Golden Temple) का निर्माण कार्य पूरा किया।
आदि ग्रंथ (Adi Granth) का संकलन किया, जिसमें सिख गुरुओं की वाणी (Teachings) और अन्य संतों की रचनाएँ शामिल कीं।
सिख धर्म (Sikhism) को संगठित और सुदृढ़ किया।
समाज में समानता (Equality) और भाईचारे (Brotherhood) का संदेश दिया।
गुरु अर्जन देव जी की शहादत (Martyrdom of Guru Arjan Dev Ji)
गुरु अर्जन देव जी ने मुगल शासक जहांगीर के अत्याचार और धार्मिक असहिष्णुता का साहसपूर्वक सामना किया।
उन्हें लाहौर (Lahore) में कठोर यातनाएँ दी गईं और 30 मई 1606 को उन्होंने शहादत (Martyrdom) प्राप्त की।
उनकी शहादत ने सिख धर्म (Sikhism) को और मजबूत किया और आने वाली पीढ़ियों को अन्याय (Injustice) के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा दी।
➤ पाँचवे सिख गुरु (5th Sikh Guru)
➤ पहले सिख शहीद (First Sikh Martyr)
➤ हरमंदर साहिब (Golden Temple) का निर्माण
➤ आदि ग्रंथ (Adi Granth) का संकलन
➤ धर्म, सत्य और न्याय के लिए बलिदान