एंजेलिना अरोड़ा (Angelina Arora)

एंजेलिना अरोड़ा (Angelina Arora)

Category:

  • वैज्ञानिक (Scientist)
  • प्रेरणास्रोत (Inspirational Figure)
  • जैव-प्लास्टिक अनुसंधानकर्ता (Bioplastics Researcher)

Biography

Birth Place: एंजेलिना मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया में पली-बढ़ी हैं, एडेलाइड (Adelaide) ऑस्ट्रेलिया में निवास करती हैं।

Summary

एंजेलिना अरोड़ा एक युवा वैज्ञानिक हैं जिन्होंने झींगा (prawn / shrimp) के खोल और रेशमी कोकून (silk cocoons) की प्रोटीन का उपयोग करते हुए एक ऐसा जैव-प्लास्टिक तैयार किया है जो लगभग 33 दिनों में पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।

Description

  1. बचपन में उन्होंने देखा कि प्लास्टिक बैग्स का उपयोग बहुत होता है और वे पर्यावरण को नुकसान पहुँचाते हैं। इस अनुभव ने उन्हें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के विकल्प की खोज के लिए प्रेरित किया।
  2. उन्होंने पहले कॉर्नस्टार्च, पोटैटो स्टार्च जैसे ऑर्गेनिक पदार्थों से बायोप्लास्टिक बनाने की कोशिश की, लेकिन वे पानी में घुल जाते थे—इसलिए वे व्यावहारिक नहीं थे।
  3. बाद में उन्होंने झींगा के खोलों (prawn shells) से चिटिन (chitin) निकाला और उसे chitosan में परिवर्तित किया; इसके बाद इसे सिल्क कोकून की प्रोटीन fibroin के साथ मिलाया।
  4. इस बायोप्लास्टिक में प्लास्टिक के समान गुण हैं जैसे कि मजबूती, लचीलापन, स्पष्टता और पानी में न घुलने योग्य।
  5. नष्ट होने की गति बहुत तेज है: यह व्यावसायिक प्लास्टिक की तुलना में लगभग 1.5 मिलियन गुना तेज़ी से बायोडिग्रेड होता है, और लगभग 33 दिनों में पूरी तरह व्यवहार में टूट जाता है।
  6. उनके इस आविष्कार को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिताओं में पुरस्कार मिला है, जैसे NSW Young Scientist Award (2016), Innovator to Market Award (2018), BHP Billiton Foundation Science and Engineering Awards आदि।

Known For

  1. सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के पर्यावरणीय प्रभावों को देखते हुए, एक टिकाऊ और जैव-विघटनशील (biodegradable) विकल्प प्रस्तुत करना।
  2. झींगा के खोलों और रेशमी कोकून की प्रोटीन का नवाचार-युक्त उपयोग।
  3. छोटे-उम्र में वैज्ञानिक प्रयोग और खोज, जिसने उन्हें युवा वैज्ञानिकों में प्रेरणास्रोत बनाया।