Category:
- समाज सुधारक (Social Reformer)
- धार्मिक नेता (Religious Leader)
Biography
Date of Birth: 15-04-1849
Birth Place: कपूरथला, पंजाब (Kapurthala, Punjab)
Death Anniversary: 24-09-1898
Summary
भाई गुरमुख सिंह (Bhai Gurmukh Singh) 19वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध सिख (Sikh) समाज सुधारक, (Social Reformer ) शिक्षाविद और सिंह सभा आंदोलन के प्रमुख नेता थे। उन्होंने सिख समाज (Sikh Community) में शिक्षा, (Education) धर्म, (Religion ) और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा दिया। उन्होंने पंजाबी भाषा (Punjabi language ) को शिक्षा की मुख्य धारा में शामिल करने और सिख धर्म (Sikhism) की मूल शिक्षाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य किया।
Description
भाई
गुरमुख सिंह (Bhai Gurmukh Singh) का
जन्म 15 अप्रैल 1849 को
कपूरथला (Kapurthala)
(पंजाब) (Punjab)में हुआ था।
उनके पिता बसावा
सिंह कपूरथला राज्य
में राजदरबार के
रसोइये थे। प्रारंभिक शिक्षा
के बाद उन्होंने लाहौर
के गवर्नमेंट कॉलेज (Government College) से
अध्ययन किया। वह एक विद्वान, समाज
सुधारक और शिक्षक
थे। 1877 में उन्होंने लाहौर
के ओरिएंटल कॉलेज (Oriental
College) में पंजाबी
भाषा को पढ़ाए
जाने वाला विषय
बनवाया और स्वयं
उसके पहले व्याख्याता बने। 1879 में
उन्होंने लाहौर में श्री गुरु सिंह सभा की
स्थापना की, जिसने आगे
चलकर सिंह सभा आंदोलन का
रूप लिया। इस
आंदोलन का उद्देश्य सिख
धर्म को उसकी
मूल पहचान लौटाना,
समाज में फैले
अंधविश्वासों को मिटाना, और
आधुनिक शिक्षा को
बढ़ावा देना था। उन्होंने कई पंजाबी अख़बार (Punjabi Newspaper) और
पत्रिकाएँ (Magazines)
प्रारंभ कीं — “गुरमुखी
अख़बार” (1880), “सुधारक” (1886), “खालसा गज़ेट” (1886) — जिनसे सिख समाज
में शिक्षा और
एकता का प्रसार
हुआ।
उन्होंने सिख युवाओं को
शिक्षित, आत्मनिर्भर और सामाजिक रूप
से जागरूक बनने
के लिए प्रेरित किया। 24 सितंबर
1898 को
उनका निधन शिमला
के निकट कणडाघाट में
दिल का दौरा
पड़ने से हुआ।
Known For
- 1 सिंह सभा आंदोलन के संस्थापकों में से एक होना।
- 2 पंजाबी भाषा को उच्च शिक्षा में शामिल करवाने का ऐतिहासिक कार्य।
- 3 सिख समाज में आधुनिक शिक्षा और सुधार की दिशा में अग्रणी भूमिका।
- 4 सिख धर्म की शुद्धता और पहचान को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण योगदान।