गुरु अमर दास जी (Guru Amar Das Ji) का जन्म 5 मई 1479 को बसारके गाँव, अमृतसर (पंजाब) में हुआ। वे बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति वाले साधक थे, लेकिन उनकी आध्यात्मिक यात्रा और गहरी हुई जब वे गुरु अंगद देव जी (Guru Angad Dev Ji) के संपर्क में आए।
गुरु गद्दी पर आसीन (Guru Gaddi)
1552 में गुरु अंगद देव जी के देहांत के बाद, गुरु अमर दास जी को सिख धर्म का तीसरा गुरु (Third Sikh Guru) बनाया गया। उस समय उनकी आयु 73 वर्ष थी।
गुरु अमर दास जी का योगदान और शिक्षाएँ (Teachings & Contributions of Guru Amar Das Ji)
लंगर प्रणाली (Langar System) को और अधिक संगठित किया तथा इसे हर सिख के लिए अनिवार्य बनाया।
जातिवाद (Caste System) और ऊँच-नीच की प्रथा का कड़ा विरोध किया।
महिलाओं की समानता (Women Empowerment), धार्मिक अधिकार और समाज में सम्मान के लिए कार्य किया।
गुंडवाल साहिब (Goindwal Sahib) नगर की स्थापना की।
सिख धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए 22 उपदेशक (Preachers) नियुक्त किए।
समाज सुधार (Social Reforms by Guru Amar Das Ji)
गुरु अमर दास जी ने सिख धर्म (Sikhism) को एक सामाजिक क्रांति (Social Revolution) का आधार बनाया। उन्होंने भेदभाव रहित और समानता पर आधारित समाज (Equality & Social Justice) की कल्पना प्रस्तुत की।
अंतिम समय (Death of Guru Amar Das Ji)
1 सितंबर 1574 को गुंडवाल साहिब (पंजाब) में गुरु अमर दास जी का देहांत (Death) हुआ।
उन्होंने गुरु गद्दी अपने दामाद और शिष्य गुरु राम दास जी (Guru Ram Das Ji) को सौंप दी।
सिख धर्म के तीसरे गुरु (3rd Sikh Guru)
➤ लंगर परंपरा को मज़बूत करना
➤ जातिवाद और ऊँच-नीच का विरोध
➤ महिलाओं को अधिकार और समानता देना
➤ गुिंडवाल साहिब की स्थापना
➤ समाज सुधारक और आध्यात्मिक मार्गदर्शक