राजनीति में भागीदारी – नेतृत्व का बीज बोना होगा

राजनीति में भागीदारी – नेतृत्व का बीज बोना होगा

राजनीति में भागीदारी – नेतृत्व का बीज बोना होगा

राजनीति में भाग लें, नेतृत्व करें

"राजनीति से दूरी,  समाज की अधूरी तस्वीर है। जब तक हमारे हाथों में निर्णय लेने की शक्ति नहीं, तब तक कोई भी विकास केवल दूसरों की कृपा का विषय रहेगा।"

आज खत्री समाज को जरूरत है, केवल मंचों और संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की नहीं, जनता के बीच एक जननेता की उपस्थिति की। यह नेतृत्व बिना तैयारी, बिना प्रशिक्षण और बिना संगठित सोच के नहीं आएगा। दुर्भाग्यवश, खत्री समाज की राजनीतिक चेतना अभी भी चुनावों से सिर्फ चार-पाँच महीने पहले ही जागती है। युवा प्रत्याशी फॉर्म भरते हैं, लेकिन उसके पहले न तैयारी होती है, न जनसंपर्क। इसके विपरीत, अन्य समाजों में यही तैयारी पाँच वर्षों तक निरंतर चलती है राजनीति उनके खून में है, लेकिन हमारे यहाँ वह सिर्फ फोटो खिंचवाने की औपचारिकता बनकर रह गई है।

एक उदाहरण से समझें — गुरुग्राम नगर निगम में खत्री समाज के वोटरों की संख्या कई वार्डों में अन्य समाजों से दोगुनी है, लेकिन हम केवल दो पार्षद जितवा पाते हैं। जबकि जागरूक और संगठित समाजों ने अपने छोटे-छोटे वोट बैंक से 9 से 11 पार्षद खड़े कर दिए। ऐसा क्यों? क्योंकि उन्होंने संगठन को प्राथमिकता दी, अपने युवाओं को राजनीतिक रूप से शिक्षित किया, और सामूहिक रणनीति के साथ मतदाता को जोड़ने का कार्य किया।

हमारे समाज में न तो “ट्रेनिंग कैंप” होते हैं, न ही “युवा नेतृत्व सशक्तिकरण योजना।” हम अपने ही नेताओं की रैली में संकोच से भर जाते हैं, और जब अपने समाज का प्रत्याशी खड़ा होता है, तो कुछ लोग उसके खिलाफ ही काम करते हैं। ये स्वाभिमान की हार नहीं, दिशा और जागरूकता की कमी का परिणाम है।

अब वक्त आ गया है कि खत्री समाज अपनी राजनीतिक शक्ति को जागृत करे — एक रणनीति के साथ, योजना के साथ और संकल्प के साथ।
हमें अपने युवाओं को कॉलेज स्तर से ही नेतृत्व के लिए तैयार करना होगा — छात्रसंघ चुनावों से शुरुआत करें, पंचायतों से लेकर निगमों और विधानसभाओं तक अपनी उपस्थिति बनाएं। खत्री समाज को चाहिए कि वह "युवा शक्ति शिविर"  लगाए, जहाँ राजनीति की बारीकियाँ, जनसम्पर्क, भाषण कला, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, और चुनावी रणनीति का प्रशिक्षण दिया जाए। खत्री युवा मोर्चा  जैसा कोई संगठन हर जिले में बने, जो केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि परिणाम के लिए काम करे।

कोई नेता तभी मजबूत होता है जब उसके पीछे समाज खड़ा होता है। अगर हमारे वोटर अपने ही समाज के उम्मीदवार का प्रचार नहीं करते, रैलियों में नहीं आते, तो हम कभी भी सत्ता की राजनीति में निर्णायक भूमिका नहीं निभा सकते। हमें यह समझना होगा कि जितने अधिक जनप्रतिनिधि होंगे, उतनी ही अधिक हमारी आवाज सत्ता के गलियारों में गूंजेगी।

राजनीति केवल सत्ता तक पहुँचने का माध्यम नहीं, यह समाज के वजूद को सुरक्षा देने का जरिया है। हमें अब नये चेहरे, नये विचार और नये उत्साह के साथ राजनीतिक भागीदारी की शुरुआत करनी होगी। एक ऐसा राजनीतिक जागरण अभियान शुरू किया जाए जो हर वार्ड, हर जिले और हर कॉलेज तक पहुंचे। ताकि जब अगला चुनाव आए, तो खत्री समाज न केवल प्रत्याशी खड़ा करे, बल्कि उसे विजयी भी बनाए – संगठित, सशक्त और स्वाभिमानी होकर।

अब समय है सिर झुकाकर विनती करने का नहीं, सिर उठाकर नेतृत्व करने का।”
हमें अपने भाग्यविधाता स्वयं बनना होगा – और इसकी शुरुआत राजनीति से होती है।”

लिखित द्वारा: खत्रीनामा टीम